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Saturday, October 20, 2018

क्या आपको पता है बख्तियार खिलजी ने क्यों तबाह किया नालंदा को ?

नालंदा विश्वविद्यालय भारत के समृद प्राचीन इतिहास का वो प्रतीक है जो विश्व ज्ञान पटल पर भारत का मस्तक हमेशा  ऊँचा रखेगा।  अपने समय में विश्व का सबसे विशाल और अनूठा विश्वविद्यालय जिसमे कम से कम 12000  छात्र पढ़ते थे. इसमें भारत के ही नहीं बल्कि चीन , तिब्बत, कोरिया और मध्य एशिया से छात्र  ज्ञान अर्जन के लिए आते थे। 


यह विश्वविद्यालय  राजगीर नगर के समीप स्थित था।  राजगीर जो की मगध सामार्ज्य की राजधानी थी. नालंदा विश्वविद्यालय  को मगध सामार्ज्य  का आश्रय प्राप्त था। मगध सामार्ज्य  के बाद भी गुप्त सामार्ज्य   द्वारा नालंदा को सहयोग मिलता रहा।  


लेकिन गुप्त काल के बाद इस विश्वविद्यालय को काल्कि बुरी नजर लग गयी।  नालंदा को तीन बार तबाह किया गया. दो बार तो नालंदा तबाही के बाद भी उठ खड़ा हुआ परन्तु तीसरा विध्वंश इतना खतरनाक था की नालन्दा फिर कभी खड़ा नहीं हो सकता और काल के गर्त में समा गया. आज हम आपको उस तीसरे विध्वंश  की कहानी  बतायेगे। 


बख्तियार खिलजी जो कि अवध की सेना का सेनापति था खुद को नवाव की नजरो मे श्रेष्ठ साबित करना चाहता था।  इसलिए उसने आसपास के इलाको पर हमला करना शुरू किया। जब उसकी नजर नालंदा पर पड़ी तो उसने उसे मात्रा एक पुजारियों का गाँव समझ के छोड़ दिया था।  लेकिन एक बार खिलजी की तबियत बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी थी।  राज दरबार के सारे हकीमो ने दिन रात एक कर दिया।  दुनिया के सारे इलाज और टोटके अपना लिए पर खिलजी की हालत में सुधार नहीं हुआ. 


तभी खिलजी को किसी ने सुझाव दिया की नालंदा में एक वैध है जो उसका इलाज कर सकते है। पहले तो किसी दूसरे धर्म वाले से इलाज की बात सोचकर खिलजी ने मना कर दिया। परन्तु जैसे जैसे खिलजी की हालत खराब होती जा रही थी खिलजी ने वैद्य को बुलाने का हुकुम दे दिया।  तब नालंदा से वैद्य राहुल श्री भद्रा को बुलाया गया. वैद्य राहुल श्री भद्रा अपने समय के प्रकांड पंडित माने जाते थे।  वैद्य राहुल श्री भद्रा ने खिलजी का इलाज करना स्वीकार कर लिया परन्तु खिलजी अभी भी अभिमान में डूबा हुआ था.उसने एक शर्त रख दी की वैद्य राहुल श्री भद्रा उसे बिना हाथ लगाए या कोई दवाई खिलाये बिना ही सही करेंगे।  खिलजी को उम्मीद थी की वैद्य राहुल श्री भद्रा अपनी हार स्वीकार कर लगे परन्तु वैद्य राहुल श्री भद्रा ने यह शर्त मान ली. 
वैद्य राहुल श्री भद्रा ने तब खिलजी के कानो में कुरान शरीफ कि कुछ इबारते पढ़ी। चमत्कारिक रूप से खिलजी की हालत में सुधार होने लगा और कुछ ही दिनों बात पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया. खिलजी के आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा।  उसे अपना मुस्लिम धर्म वैद्य राहुल श्री भद्रा के  सामने बोना नजर आने लगा। 
तब खिलजी ने नालंदा को तबाह करने का फैसला लिया. उसे कदापि मंजूर नहीं था की हिन्दू धर्म के ज्ञान के आगे उसे अपना धर्म छोटा नजर आये. खिल्जीकी सेना महीनो  नालंदा को तबाह करती रही. नालंदा में रहने वाले या तो मार दिए गए या अपनी जान बचाकर भाग गए.

"  ऐसा कहा जाता है की नालंदा के पुस्तकालय में लगी  आग तीन महिनो तक लगातार जलती रही थी. "

इससे अंदाजा लगा सकते है की नालन्दा के साथ भारत की संस्कृति के ज्ञान का कितना बड़ा सागर नष्ट हो गया.


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